Saturday, November 12, 2011

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10 comments:

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  3. Get Free Horoscope / Varshphal 2013 ( Give Call on website nos )

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  4. यदि कोई विवाहित व्यक्ति सपने में देखे कि उसका विवाह हो रहा है तो उसका दाम्पत्य जीवन कष्टपूर्ण व्यतीत होता है। सपने में यदि कोई युवती किसी सहेली के दिए हुए कंगन पहनती है तो उसका शीघ्र ही विवाह हो जाता है।

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  5. स्वप्न ज्योतिष के अनुसार जब सपने में कोई युवक या युवती किसी हिरन का शिकार कर उसे मार डाले तो उनके प्रेम संबंध टूट जाते हैं। यदि कोई प्रेमी युगल को सपने में एक साथ भोजन करते देखे तो वह शीघ्र ही दाम्पत्य सूत्र में बंध जाता है।

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  6. सपने में यदि मंगनी होती हुई दिखाई दे तो विवाह में अत्यधिक देरी होती है। यदि कोई युवती स्वप्न में स्वयं को मेले में देखे तो उसे योग्य वर की प्राप्ति होती है।

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  9. "संगति"

    एक विद्वान ने कहा है, “जल जैसी जमीन पर बहता है, उसका गुण वैसा ही बदल जाता है। मनुष्य का स्वभाव भी अच्छे-बुरे विचारों के लोगों की संगति के अनुसार बदल जाता है। इसलिए चतुर मनुष्य बुरे लोगों का साथ करने से डरते हैं, लेकिन मूर्ख व्यक्ति बुरे आदमियों के साथ घुल-मिल जाते हैं और उनके संपर्क से अपने आपको भी दुष्ट बना लेते हैं। मनुष्य की बुद्धि तो मस्तिष्क में रहती है, किंतु कीर्ति उस स्थान पर निर्भर रहती है जहां वह उठता-बैठता है और जिन लोगों या विचारों की सोहबत उसे पसंद है। आत्मा की पवित्रता मनुष्य के कार्यों पर निर्भर हैऔर उसके कार्य संगति पर निर्भर हैं। बुरे लोगों के साथ रहने वाला अच्छे काम करे यह बहुत कठिन है। धर्म से स्वर्ग की प्राप्ति होती है, किंतुधर्माचरण करने की बुद्धि सत्संग या सदुपदेशों से ही प्राप्त होती है। स्मरण रखिए कुसंग से बढ़कर कोई हानिकर वस्तु नहीं है तथा संगति से बढ़कर कोई लाभ नहीं है।”

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  10. "संगति"

    एक विद्वान ने कहा है, “जल जैसी जमीन पर बहता है, उसका गुण वैसा ही बदल जाता है। मनुष्य का स्वभाव भी अच्छे-बुरे विचारों के लोगों की संगति के अनुसार बदल जाता है। इसलिए चतुर मनुष्य बुरे लोगों का साथ करने से डरते हैं, लेकिन मूर्ख व्यक्ति बुरे आदमियों के साथ घुल-मिल जाते हैं और उनके संपर्क से अपने आपको भी दुष्ट बना लेते हैं। मनुष्य की बुद्धि तो मस्तिष्क में रहती है, किंतु कीर्ति उस स्थान पर निर्भर रहती है जहां वह उठता-बैठता है और जिन लोगों या विचारों की सोहबत उसे पसंद है। आत्मा की पवित्रता मनुष्य के कार्यों पर निर्भर हैऔर उसके कार्य संगति पर निर्भर हैं। बुरे लोगों के साथ रहने वाला अच्छे काम करे यह बहुत कठिन है। धर्म से स्वर्ग की प्राप्ति होती है, किंतुधर्माचरण करने की बुद्धि सत्संग या सदुपदेशों से ही प्राप्त होती है। स्मरण रखिए कुसंग से बढ़कर कोई हानिकर वस्तु नहीं है तथा संगति से बढ़कर कोई लाभ नहीं है।”

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